मंगलवार, 16 जुलाई 2013

गंग प्रेम

इस  गंग प्रेम की प्रखर धार में ,
बह जाता ये चेतन मन ...

होती है पीड़ा कष्ट बहुत ,
पर  मिलता है अदभुत आनंद ..

प्रेम के कारन जग है जीवित ,
प्राण भरे ये है अमृत ..

ये  गूड रहस्यों की  है माला ,
मन के सागर  की उदंड तरंग ...

प्रेम नहीं कोई कोमल पथ ,
 है तप से सिंचित एक उपवन ..
नहीं यहाँ  स्थान   कटुता का ,
भावो का होता  वंदन   ..

करुणा है आधार प्रेम का ,
त्याग है इसके कण कण में ..
मानव भी बन जाये ,देवो के तुल्य
बस जाये जो ये मन में ....

इस  गंग प्रेम की प्रखर धार में ,
बह जाता ये चेतन मन ...

                 जारी  ...
                                         "" aman  mishra  "'
                               


रविवार, 9 जून 2013

ये कैसा भारत निर्माण ...


मूल्यों के गिरते स्तर पर ,
ये कैसा भारत निर्माण ...

नैतिकता के शव पे खड़ा ,
आज का बदलता हिंदुस्तान ....

ये कैसा भारत निर्माण ...

कौन सी माता ,
किसके बच्चे...
सब झूठे है ,फिर भी सच्चे ..

चौराहों  पे बिकता आदर्श ,
 झूठे छेड़ते सत्य  की तान ...

घोटालो की खुली मंडी,
लज्जा भी हो रही हैरान .....

ये कैसा भारत निर्माण ....
.ये कैसा भारत निर्माण .....

गंगा है मैली ,मैला
यमुना का आँचल ..
ये  सुनहरा है आज ,
तो  क्या होगा अपना  कल ?

खड़ा किसान रो रहा ,
बाकि नहीं देह में जान ..
ये कैसी विकास की कीमत ,
खो रहे है  अपना मान..

बस हो रहा भारत निर्माण ...
ये कैसा  भारत निर्माण ....

बुधवार, 29 मई 2013

नील चिरैया

एक छोटी सी चिरैया ,नील पंखो वाली ...
आती थी मेरे घर ,बैठ के दीवार पे ,
कलरव करती ,चहक थी उसमे ..
दे देता था दो दाने सूखे हुए चावल ,
और ले उड़ जाती वो उन्हें ...

सोचा एक दिन देखे ये आती है कहा से ?
थोडा नजर दौड़ाई तो दिखा ,शीशम का एक पेड़ .
उसमे बना घोसला उसका ,और छोटे से दो बच्चे उसमे ..
अच्छा लगा देख कर ,शांति सी आई मन में ..

और गर्व भी हुआ मुझको उन दो दाने चावल देने पे ..
आह कितना बड़ा दानी है इन्सान ...मै..

पर कल रात ही वो पेड़ चुपके से काट दिया गया ,
न वो चिरैया थी ,न आज उसका कलरव था घर में ..
हा उस जगह पड़ा था एक टूटा हुआ घोसला ,और कुछ बिखरे हुए पंख .......

"अमन मिश्र "
—

सोमवार, 27 मई 2013

आगे बढता जाता हु....

तम से  घिरता ,जड़ता में बंधता ..
पथ का राही मै ,राहों से लड़ता ..
खुद को ही जला जला मै ,दीपक सा जल जाता हु ..
बस आगे बढता जाता हु ,बस आगे बढ़ता  जाता हु ...

नित नए भ्रमो की भटकन ,
राहों के वो नए नए रंग ,
इन सभी पाशों से उलझा ..
खुद ही तलवार उठता हु ..
बस आगे बढता जाता हु बस आगे बढता जाता हु ...

नित नयी वेला की आशा ,
समय चक्र का खेल तमाशा ,
रखते हुए ह्रदय मोम सा ,
"अमन "पत्थर का बन जाता हु ....
बस आगे बढता जाता हु बस आगे बढता जाता हु ...


            " अमन मिश्र "

note: pic from other blog with a lots of thank you....






सोमवार, 13 मई 2013

आह यही जिंदगी है..

यु बैठा तनहा ,
स्याह पन्नो को पलटता ..
जिंदगी के कुछ लम्हों को  फिर से पाने  को,
आज मै  बेक़रार हू ..

बंद आँखों से ,
लहराते सागर ,घुमड़ते आसमान को  देखता  ,

कल्पना में तेरे साथ को पाता,
खुद में ही खोता , लहरों में झूलता ..
में उन सपनो को फिर से जीने को बेक़रार हू ..

पर फिर याद आता है ,
इस समाज का चेहरा ,
हसता मुस्कुराता ,
जहर  से भरा  ,
बस पीछे हट जाते है मेरे कदम ,
अरमानो को बांध लेता हू खुद के भीतर ही ,
खुद के लिए नहीं ,बस तेरे खातिर ,
समझौते करता ,एक  झूठी हसी लिए ,
खुद के सपनो को खुद ही तोड़ता ,

सूखे पेड़ सा गिरने का इंतजार करता .
की कब आएगी कोई हवा ले जाएगी तुझे मुझसे दूर ,
कुछ न कह पाउँगा मै ,
मुट्टी भी बंद होगी ,
पर हाथ तो बंधे होगे ,
बस तेरे खातिर ,तेरी मुस्कराहट को  ,
कट जाऊंगा एक  पेड़ सा ,
बिना किसी चीख के ,बिना किसी रुदन   के .
बस तेरे खातिर ..बस तेरे खातिर ..
आह यही जिंदगी है, यही प्यार है ......................

                                                 "अमन मिश्र"

रविवार, 21 अप्रैल 2013

बलात्कार :दोषी सिर्फ बलात्कारी ? या कोई और भी ..

बलात्कार :दोषी  सिर्फ बलात्कारी ? या कोई और भी ..  ज्यादा टाइम न लूँगा आपका , क्यों  की वैसे भी फ़ास्ट जमाना है .. खाना भी २ मिनट में बनाना चाहिए तो पूरा लेख तो सभी पड़ने से रहे , फिर भी कुछ बातो को  सामने रखना चाहूँगा .... जहा देखो आज कल बलात्कारियो को ये सजा दे दो वो सजा दे दो ,न जाने क्या क्या कितनी टाइप की सजा दे दो ,की आवाज आ रही है , ये वही है जिन्हें फिल्म में जब हीरो विलन को मरता है तब जैसी  मजा आती है , यहाँ भी वो बस मजा ढूंड रहे है ... आखिर सजा देने से बात सुधरती होती तो , अभी के हालिया महीनो में कई जगह ऐसे दोषियों को बहुत कड़ी सजाये दी गयी है , पर मै इस बहस में नहीं पड़ना चाहूँगा ... अह तो आता हु असल मुद्दे पे ...

आखिर ऐसा होता क्यों है , ध्यान देने की जरुरत है जड़ तक जाने की जरुरत है ....
कुछ बिन्दुओ की और ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा ...

१. बलात्कार के दोषियों में शायद ही कोई १०-१२ साल का हो.. सभी की उम्र १६ या उससे उपर ही सुनी मैंने , हो सकता है की अपवाद हो ..
ध्यान देने वाली बात है की इस उम्र में व्यक्ति प्राकतिक तौर पे परिवर्तन से गुजरता है और अति संवेदनशील होता है .. फैसले जल्दबाजी में लिए जाते है , कई बार अदालतों ने भी इस तत्थ्य पे सभी का ध्यान आकर्षित किया है .. ये भी एक कारन हो सकता है इस प्रकार की घटनाओ के लिए ..

२. जब हम दिन रात टीवी पे ,मीडिया पे बस ऐसे ही विज्ञापन देखते रहते है ,की ये करो तो लड़की मिलेगी वो करो तो लड़की मिलेगी ...  सीमेंट की मजबूती भी लड़की दिखाती है , नौकरी ,और छोकरी तभी मिलेगी जब बत्तीसी जक्कास होगी .. अभी न्यूज़ चैनल देख रहा था , गुडिया को बचाना है .. विज्ञापन में एक लड़की आ कर बताती है की बोयस को नहीं पता की हमें क्या पसंद है , फला  तेल लगाओ , ये मर्दों के लिए  वगैरह  वगैरह .. जब नारी  को भोग  की सामग्री दिखाया जायेगा तो लोगो के मन में क्या प्रभाव पड़ेगा सोचने वाली बात है ...

३.. एक बात और सोचने वाली है की सुरुवात से ही हम बन्धनों में रहते है , जब व्यक्ति नशे में होता है तो वो इसे तोड़ने का प्रयास करता है और कई बार परिणाम बहुत बुरा हो जाता है ..

४.. बलात्कार की कई घटनाये  हमें ऐसे पता चलती है की फला ने आरोप लगाया की मेरे साथ बलात्कार हुआ... कई बार ऐसी बाते आपसी सहमति से होती है पर पकड़ में आने पर बलात्कार का आरोप लगाया जाता है.. माननीय सर्वोच्य न्यायलय भी इस बात पे चिंता जाहिर कर चुका है ...
५. बलात्कारी भी हमारे आपके बीच का व्यक्ति है , कही  न कही  समाज में भी  कमी है जो इस तरह की घटनाये हो रही है .. जब हम लडकियों पे कई तरह के बंधन लगाते है , लडको पे नहीं तब प्रॉब्लम सामने आती है .. ये इन्सान  का प्राकृतिक  स्वाभाव है जो जिंतना छुपाने की चेष्टा करता है सामने वाला उस पर उतना ही ध्यान लगता है .. अगर हम दोनों को ही बराबर का स्थान दे तो भी समस्या सुधर सकती है , यहाँ इस बात पे भीध्यान आकर्षित करना चाहूँगा की सिर्फ लडको को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता कई  बार लड़की की भी गलती सामने आती है पर उस पर कोई ध्यान नहीं देता  और  उन्हें बल मिलता है की जो कुछ भी हुआ आखिर फसेगा तो लड़का ही ..इसे रोकने की जरुरत है ..

ये कुछ तथ्य थे जिन पर मैंने आप सभी का ध्यान आकर्षित किया अब आपको सोचने की जरुरत है की कौन दोषी है , सिर्फ बलात्कारी या कोई और भी.... 

                   जय हिन्द ..

बुधवार, 17 अप्रैल 2013

जिंदगी ..

पल में तोला,
पल में माशा है ये जिंदगी ..

कभी डूबती नाव सी,
कभी छोटी सी आशा है जिंदगी ...

कभी गम है , कभी है तन्हाई .,
किसी के मन का दिलाशा है ये जिंदगी ...

पल में तोला, पल में माशा है ये जिंदगी ..

एक फूल की छुअन ,
 काटें की चुभन .
उगता हुआ सूरज,
बड़ता हुआ अँधेरा .
काली सी रात ,खिलता  सवेरा ..

चुभते हुए लफ्ज , प्रेम की भाषा है जिंदगी....

पल में तोला, पल में माशा है ये जिंदगी ..

रंगों को समेटे , रंगों को बिखेरे ..
सपनो के समुन्दर, चाहतो के मेले .
न जाने क्या है, समाये है खुद में ..
खुद को पाने की एक आशा है जिंदगी ...

पल में तोला, पल में माशा है ये जिंदगी ..

                          "  अमन मिश्र "

रातों रात पेड़ काट दिए, जंगल जला दिए। हम सोए रहे, नदिया सूखा दिए। वो चिड़िया अब रोती है, घोसले गवा दिए, कुछ आंखो में पानी लाओ, जो बोतल...